Duniya ke saat ajoobe
यहां नीचे हमने प्राचीन विश्व के उन सात अजूबों की लिस्ट दी है जो पहले के जमाने में सात अजूबे माने गए थे लेकिन अब इनमें से अधिकांश अजूबे नष्ट हो चुके हैं एवं इन सात अजूबों की जगह नए सात अजूबों को चुना गया है।
2. स्टेचू ऑफ़ ज़ीउस अट ओलम्पिया
3. हैंगिंग गार्डन ऑफ़ बेबीलोन
4. टेम्पल ऑफ़ आर्टेमिस
5. कोलोसुस ऑफ़ रोडेज
6. माउसोलस का मकबरा
7. लाइटहाउस ऑफ़ अलेक्सान्दिरा
इन सात अजूबों में से सिर्फ एक अजूबा बचा हुआ है जिसका नाम है ग्रेट पिरामिड ऑफ़ ग़िज़ा। बाकी सभी 6 अजूबे अब नष्ट हो गए हैं। इन पुराने सात अजूबों के खत्म हो जाने के बाद दुनिया के नए सात अजूबे की तलाश शुरू हुई। क्या आप जानते हैं की दुनिया के नए सात अजूबे कैसे चुने गए?
ताज महल भारत के आगरा में स्थित है। ताज महल की खूबसूरती एवं इसकी कलाकारी की वजह से इसे दुनिया के सात अजूबों में से एक माना गया है। ताजमहल का निर्माण मुगल सम्राट शाहजहां के द्वारा 1632 में किया गया था। उन्होंने अपनी पत्नी मुमताज महल की याद में ताजमहल बनवाया था। इसीलिए ताजमहल को प्यार की निशानी भी कहा जाता है। ताजमहल को बनवाने के लिए शाहजहां ने दुनिया भर से सफेद संगमरमर का पत्थर मंगवाया था। इस मकबरे के चारों तरफ बगीचा है तथा सामने पानी है। ताजमहल के जैसी खूबसूरती आपको दुनिया में कहीं और देखने को नहीं मिलेगी। इसे बनाने में लगभग 15 साल का समय लगा था। कहते हैं कि ताजमहल बनवाने के बाद शाहजहां ने सभी मजदूरों के हाथ कटवा दिए थे। उन्होंने ऐसा इसलिए किया था ताकि ऐसा दूसरा ताजमहल ना बन सके। ताजमहल की सुंदरता देखने के लिए दुनिया भर से पर्यटक हर साल भारत आते हैं।
आपको बता दें कि चीन की दीवार एक साथ इतनी लंबी नहीं बनाई गई थी। यह अलग-अलग राज्यों के कई राजाओं द्वारा उत्तरी हमलावरों से रक्षा करने के लिए बनाई गई थी, जिसे बाद में जोड़ा गया। अब यह एक किलेनुमा आकार में बन गई है। चीन की दीवार को "द ग्रेट वॉल ऑफ चाइना" भी कहते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि चीन की दीवार इतनी बड़ी है कि इसे अंतरिक्ष से भी देखा जा सकता है। यह दीवार चीन के पूर्व से लेकर पश्चिम तक फैली हुई है जिसकी लंबाई 6400 किलोमीटर है और ऊंचाई लगभग 35 फीट है। वहीं अगर इसकी चौड़ाई देखें तो यह इतनी चौड़ी है कि करीब 10 से 15 लोग एक साथ आराम से इसमें चल सकते हैं। इसका निर्माण सातवीं शताब्दी से लेकर 16 शताब्दी तक होता रहा। कहते हैं कि इस दीवार को बनाने में करीब 15 से 30 लाख लोगों ने अपना संपूर्ण जीवन लगा दिया था। एवं इसे मिट्टी, पत्थर, लकड़ी, ईंट की सहायता से बनाया गया।
यह भगवान ईसा मसीह की सबसे बड़ी मूर्ति है जो ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में स्थित है। भगवान यीशु की यह मूर्ति 38 मीटर यानी कि लगभग 130 फीट ऊंची है तथा 28 मीटर चौड़ी है। इसकी इतनी लंबाई, चौड़ाई की वजह से इसे दुनिया के सात अजूबों में जगह दी गई। इससे ऊंची मूर्ति आज तक नहीं बनी है। इस मूर्ति का निर्माण 1922 में शुरू किया गया था एवं नौ साल बाद इसे 12 अक्टूबर, 1931 को इसे स्थापित किया गया। कहते हैं कि फ्रांस के महान मूर्तिकार लेनदोव्सकी ने इसे बनाकर तैयार किया। वहीं ब्राजील से सिल्वा कोस्टा ने इसे डिजाइन किया था। यह मूर्ति करीब 635 टन की है जिसे रियो शहर के तिजुका फॉरेस्ट नेशनल पार्क में 700 मीटर ऊंची कोर्कोवाड़ों पहाड़ी पर स्थित है। इस मूर्ति को देखने के लिए दुनिया भर से ईसाई धर्म के लोग यहां आते हैं।
माचू पिच्चु साउथ अमेरिका के देश पेरू का एक ऐतिहासिक स्थल है जो एक ऊंची चोटी पर स्थित एक शहर है। यहां कोलंबस पूर्व युग, इंका सभ्यता रहा करती थी। इस ऐतिहासिक स्थल की समुद्र तल से ऊंचाई 2430 मीटर है जो कि वाकई में हैरान करती है कि आखिर इतनी ऊंचाई पर लोग कैसे रहा करते थे। कहते हैं कि इस जगह का निर्माण 1400 के आसपास राजा पचाकुती द्वारा कराया था और वहां इंका सभ्यता रहती थी। इसके 100 वर्ष बाद इस पर स्पेन ने जीत हासिल की थी और इसे ऐसे छोड़ दिया गया था। उसके बाद यहां सभ्यता धीरे-धीरे खत्म होती गई लेकिन 1911 में हिरम बिंघम जो कि एक अमेरिकी इतिहासकार थे उन्होंने इसकी खोज की व उन्होंने इसे दुनिया के सामने लाया। यूनेस्को ने 1983 में इसे विश्व की धरोहर के रूप में घोषित किया। यहां इंका सभ्यता की कलाकृतियां आज भी देखी जा सकती हैं और काफी चीजें आज भी मौजूद है। माचू पिच्चु की यह सभी कलाकृतियां एवं पुरानी चीजें पर्यटकों को काफी आकर्षित करती हैं।
कोलोजियम इटली की राजधानी रोम में स्थित एक विशाल स्टेडियम है। यह रोम का एक देखने लायक मुख्य आकर्षण है, जिसका निर्माण तब के शासक वेस्पियान द्वारा 72 AD में शुरू हुआ व 80 AD में पूरा हुआ। इस विशाल स्टेडियम को कंक्रीट और रेत से बनाया गया जिसका आकार ओवल शेप का है। यह विशाल स्टेडियम कई प्राकृतिक आपदाओं और भूकंप उसे ध्वस्त हुआ दिखता है लेकिन आज भी इसकी भव्यता एवं विशालता वैसी ही है। यह इतना ज्यादा विशाल है कि इसमें 50 हजार से 80 हजार तक लोग आराम से बैठ सकते हैं। यह मुख्यतः जानवरों की लड़ाई, खेलकूद एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए उपयोग में लिया जाता है। इस स्टेडियम का आकार ऐसा है कि इसे इंजीनियरों ने बनाने की कोशिश की लेकिन यह एक पहेली बनकर ही रह गया है जिसे आज तक कोई सुलझा नहीं पाया।
पेट्रा एक ऐतिहासिक नगरी है जो जॉर्डन के मयान प्रांत में बसी हुई है। यह बड़ी-बड़ी चट्टानों और पत्थर से तराशे गई इमारतों के लिए प्रख्यात है। इसकी खास बात यह है कि इसमें आपको पत्थर से तराशी गई एक से बढ़कर एक इमारतें देखने को मिलेंगी। वहीं इसके अलावा यहां तालाब और नेहरे भी हैं जो कि काफी सुनियोजित तरीके से बनाई गई है। जिसे देखने के लिए यहां काफी लोग आते हैं। इस शहर को रोज़ सिटी भी कहते है क्यूंकि यहां पत्थरों को काटकर कलाकृतियां बनाई गई है जो कि लाल रंग की है। कहते हैं कि 1200 ईसा पूर्व के आसपास इसका निर्माण कार्य शुरू किया गया था। लेकिन आज के समय में यह एक बहुत ही जाना माना पर्यटन स्थल बन गया है। बता दें कि पेट्रा को यूनेस्को ने विश्व की धरोहर के रूप में घोषित किया है। वहीं इसे विश्व के सात अजूबों में भी शामिल किया गया है।
यह एक बहुत पुराना एवं प्रसिद्ध मयान मंदिर है जो कि मेक्सिको में स्थित है। यह सबसे बड़े मयान मंदिर में से एक है। इसका निर्माण 600 ईसा पूर्व हुआ था। यह मंदिर लगभग 5 किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। एवं इसका आकार पिरामिड जैसा है। 79 फीट ऊंचाई के इस मंदिर में ऊपर जाने के लिए चारों ओर सीढ़ियां बनाई गई है जिसमें हर दिशा में लगभग 91 सीढ़ियां हैं यानी कि कुल मिलाकर इस मंदिर में 365 सीढ़ियां है जो कि साल के 365 दिन का प्रतीक है। साथ ही चिचेन इत्जा माया का एक सबसे बड़ा शहर भी है जिसकी जनसंख्या भी काफी अधिक है।
हेल्लो दोस्तों!!
आज हम आपको बताने जा रहे हैं "दुनिया के सात अजूबे" के बारे में। हम सभी ने स्कूल में GK के विषय में दुनिया के सात अजूबों के बारे में पढ़ा है। लेकिन फिर भी बहुत कम लोग duniya ke saat ajoobe kaun kaun se hai ये जानते हैं। कुछ लोग दुनिया के सात अजूबों के नाम पर सिर्फ ताजमहल और चीन की दीवार के बारे में ही जानते हैं। लेकिन चिंता कि कोई बात नहीं। आज हम आपको दुनिया के सात अजूबों से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी देंगे। आपको दुनिया के सात अजूबों के बारे में पढ़कर बहुत मजा आएगा। तो इस पोस्ट को अंत तक पढ़िएगा।
आज हम आपको बताने जा रहे हैं "दुनिया के सात अजूबे" के बारे में। हम सभी ने स्कूल में GK के विषय में दुनिया के सात अजूबों के बारे में पढ़ा है। लेकिन फिर भी बहुत कम लोग duniya ke saat ajoobe kaun kaun se hai ये जानते हैं। कुछ लोग दुनिया के सात अजूबों के नाम पर सिर्फ ताजमहल और चीन की दीवार के बारे में ही जानते हैं। लेकिन चिंता कि कोई बात नहीं। आज हम आपको दुनिया के सात अजूबों से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी देंगे। आपको दुनिया के सात अजूबों के बारे में पढ़कर बहुत मजा आएगा। तो इस पोस्ट को अंत तक पढ़िएगा।
इसमें हमने आपको दुनिया के सात नए अजूबों के बारे में बताया है यह कहां पर स्थित हैं? वे कब बनाए गए? किसके द्वारा बनाए गए? सब कुछ हम बताएंगे। इसके साथ हम आपको प्राचीन विश्व के सात अजूबों के बारे में भी बताएंगे जो लगभग अब खत्म हो चुके हैं जिनकी जगह पर अब नए सात अजूबों को चुना गया है। तो आइए दोस्तों जल्दी से शुरू करते हैं।
दोस्तों आइए सबसे पहले यह जान लेते हैं कि प्राचीन duniya ke saat ajoobe कौन से हैं जो अब नष्ट हो चुके हैं।
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Duniya ka sabse amir aadami
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प्राचीन Vishwa ke saat ajoobe जो अब नष्ट हो चुके हैं
दोस्तों क्या आप जानते हैं दुनिया के सात अजूबे का विचार सबसे पहले हेरोडोटस और कल्लिमचुस को आया था। लगभग 2200 पहले दुनिया के पहले सात अजूबे चुने गए थे। लेकिन आपको बता दें कि अब यह अजूबे लगभग नष्ट हो चुके हैं। और इनकी जगह विश्व के नए सात अजूबों को चुन लिया गया है। आइए जानते हैं पुराने सात अजूबे कौन से थे।यहां नीचे हमने प्राचीन विश्व के उन सात अजूबों की लिस्ट दी है जो पहले के जमाने में सात अजूबे माने गए थे लेकिन अब इनमें से अधिकांश अजूबे नष्ट हो चुके हैं एवं इन सात अजूबों की जगह नए सात अजूबों को चुना गया है।
पुराने सात अजूबों की लिस्ट
1. ग्रेट पिरामिड ऑफ़ गिज़ा2. स्टेचू ऑफ़ ज़ीउस अट ओलम्पिया
3. हैंगिंग गार्डन ऑफ़ बेबीलोन
4. टेम्पल ऑफ़ आर्टेमिस
5. कोलोसुस ऑफ़ रोडेज
6. माउसोलस का मकबरा
7. लाइटहाउस ऑफ़ अलेक्सान्दिरा
इन सात अजूबों में से सिर्फ एक अजूबा बचा हुआ है जिसका नाम है ग्रेट पिरामिड ऑफ़ ग़िज़ा। बाकी सभी 6 अजूबे अब नष्ट हो गए हैं। इन पुराने सात अजूबों के खत्म हो जाने के बाद दुनिया के नए सात अजूबे की तलाश शुरू हुई। क्या आप जानते हैं की दुनिया के नए सात अजूबे कैसे चुने गए?
कैसे चुने गए दुनिया के नए सात अजूबे?
दुनिया के नए सात अजूबों को चुनने का विचार 21वीं सदी शुरू होने से पहले 1999 में आया। यह कार्य सबसे पहले स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख में शुरू किया गया। इस कार्य को करने के लिए एक फाउंडेशन बनाई गई जिसका नाम था न्यू सेवन वंडर फाउंडेशन। इस फाउंडेशन ने एक वेबसाइट बनाई जिसमें दुनिया की लगभग 200 कलाकृतियों की एक लिस्ट बनाई। फिर इंटरनेट के माध्यम से वोटिंग कराई गई जिसमें 200 में से 7 एंट्रीज को चुनना था। न्यू सेवन वंडर फाउंडेशन के अनुसार यह वोटिंग कई सालों तक चली व 7 जुलाई, 2007 को लिस्बन में इसका फाइनल रिजल्ट आया और तब हमारे सामने दुनिया के सात नए अजूबे आए।दुनिया के सात अजूबों की लिस्ट
यह है दुनिया के सात अजूबे:--| क्रमांक | अजूबा | स्थान | निर्माण |
| 1. | ताज महल | भारत | 1648 |
| 2. | चीन की दीवार | चीन | 7 वीं BC शताब्दी में |
| 3. | क्राइस्ट रिडीमर | ब्राज़ील | 1931 |
| 4. | माचू पिच्चु | पेरू | AD 1450 |
| 5. | कोलोजियम | इटली | AD 80 |
| 6. | पेट्रा | जॉर्डन | 100 BC |
| 7. | चिचेन इत्ज़ा | मेक्सिको | AD 600 |
sourcs: wikipedia
आइए अब विस्तार से जानते हैं दुनिया के इन नए सात अजूबों के बारे में। आपको इन सात अजूबों की रोचक बातों को जानकर बहुत मजा आएगा। आइए शुरू करते हैं।
दुनिया के सात अजूबों की विस्तृत जानकारी
यहां हम एक-एक करके दुनिया के सातों नए अजूबों का इतिहास आपसे साझा करेंगे साथ ही इनसे जुड़ी कुछ रोचक बातें भी आपको बताएंगे।ताज महल
ताज महल भारत के आगरा में स्थित है। ताज महल की खूबसूरती एवं इसकी कलाकारी की वजह से इसे दुनिया के सात अजूबों में से एक माना गया है। ताजमहल का निर्माण मुगल सम्राट शाहजहां के द्वारा 1632 में किया गया था। उन्होंने अपनी पत्नी मुमताज महल की याद में ताजमहल बनवाया था। इसीलिए ताजमहल को प्यार की निशानी भी कहा जाता है। ताजमहल को बनवाने के लिए शाहजहां ने दुनिया भर से सफेद संगमरमर का पत्थर मंगवाया था। इस मकबरे के चारों तरफ बगीचा है तथा सामने पानी है। ताजमहल के जैसी खूबसूरती आपको दुनिया में कहीं और देखने को नहीं मिलेगी। इसे बनाने में लगभग 15 साल का समय लगा था। कहते हैं कि ताजमहल बनवाने के बाद शाहजहां ने सभी मजदूरों के हाथ कटवा दिए थे। उन्होंने ऐसा इसलिए किया था ताकि ऐसा दूसरा ताजमहल ना बन सके। ताजमहल की सुंदरता देखने के लिए दुनिया भर से पर्यटक हर साल भारत आते हैं।
चीन की दीवार
आपको बता दें कि चीन की दीवार एक साथ इतनी लंबी नहीं बनाई गई थी। यह अलग-अलग राज्यों के कई राजाओं द्वारा उत्तरी हमलावरों से रक्षा करने के लिए बनाई गई थी, जिसे बाद में जोड़ा गया। अब यह एक किलेनुमा आकार में बन गई है। चीन की दीवार को "द ग्रेट वॉल ऑफ चाइना" भी कहते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि चीन की दीवार इतनी बड़ी है कि इसे अंतरिक्ष से भी देखा जा सकता है। यह दीवार चीन के पूर्व से लेकर पश्चिम तक फैली हुई है जिसकी लंबाई 6400 किलोमीटर है और ऊंचाई लगभग 35 फीट है। वहीं अगर इसकी चौड़ाई देखें तो यह इतनी चौड़ी है कि करीब 10 से 15 लोग एक साथ आराम से इसमें चल सकते हैं। इसका निर्माण सातवीं शताब्दी से लेकर 16 शताब्दी तक होता रहा। कहते हैं कि इस दीवार को बनाने में करीब 15 से 30 लाख लोगों ने अपना संपूर्ण जीवन लगा दिया था। एवं इसे मिट्टी, पत्थर, लकड़ी, ईंट की सहायता से बनाया गया।
क्राइस्ट रिडीमर
यह भगवान ईसा मसीह की सबसे बड़ी मूर्ति है जो ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में स्थित है। भगवान यीशु की यह मूर्ति 38 मीटर यानी कि लगभग 130 फीट ऊंची है तथा 28 मीटर चौड़ी है। इसकी इतनी लंबाई, चौड़ाई की वजह से इसे दुनिया के सात अजूबों में जगह दी गई। इससे ऊंची मूर्ति आज तक नहीं बनी है। इस मूर्ति का निर्माण 1922 में शुरू किया गया था एवं नौ साल बाद इसे 12 अक्टूबर, 1931 को इसे स्थापित किया गया। कहते हैं कि फ्रांस के महान मूर्तिकार लेनदोव्सकी ने इसे बनाकर तैयार किया। वहीं ब्राजील से सिल्वा कोस्टा ने इसे डिजाइन किया था। यह मूर्ति करीब 635 टन की है जिसे रियो शहर के तिजुका फॉरेस्ट नेशनल पार्क में 700 मीटर ऊंची कोर्कोवाड़ों पहाड़ी पर स्थित है। इस मूर्ति को देखने के लिए दुनिया भर से ईसाई धर्म के लोग यहां आते हैं।
माचू पिच्चु
माचू पिच्चु साउथ अमेरिका के देश पेरू का एक ऐतिहासिक स्थल है जो एक ऊंची चोटी पर स्थित एक शहर है। यहां कोलंबस पूर्व युग, इंका सभ्यता रहा करती थी। इस ऐतिहासिक स्थल की समुद्र तल से ऊंचाई 2430 मीटर है जो कि वाकई में हैरान करती है कि आखिर इतनी ऊंचाई पर लोग कैसे रहा करते थे। कहते हैं कि इस जगह का निर्माण 1400 के आसपास राजा पचाकुती द्वारा कराया था और वहां इंका सभ्यता रहती थी। इसके 100 वर्ष बाद इस पर स्पेन ने जीत हासिल की थी और इसे ऐसे छोड़ दिया गया था। उसके बाद यहां सभ्यता धीरे-धीरे खत्म होती गई लेकिन 1911 में हिरम बिंघम जो कि एक अमेरिकी इतिहासकार थे उन्होंने इसकी खोज की व उन्होंने इसे दुनिया के सामने लाया। यूनेस्को ने 1983 में इसे विश्व की धरोहर के रूप में घोषित किया। यहां इंका सभ्यता की कलाकृतियां आज भी देखी जा सकती हैं और काफी चीजें आज भी मौजूद है। माचू पिच्चु की यह सभी कलाकृतियां एवं पुरानी चीजें पर्यटकों को काफी आकर्षित करती हैं।
कोलोजियम
कोलोजियम इटली की राजधानी रोम में स्थित एक विशाल स्टेडियम है। यह रोम का एक देखने लायक मुख्य आकर्षण है, जिसका निर्माण तब के शासक वेस्पियान द्वारा 72 AD में शुरू हुआ व 80 AD में पूरा हुआ। इस विशाल स्टेडियम को कंक्रीट और रेत से बनाया गया जिसका आकार ओवल शेप का है। यह विशाल स्टेडियम कई प्राकृतिक आपदाओं और भूकंप उसे ध्वस्त हुआ दिखता है लेकिन आज भी इसकी भव्यता एवं विशालता वैसी ही है। यह इतना ज्यादा विशाल है कि इसमें 50 हजार से 80 हजार तक लोग आराम से बैठ सकते हैं। यह मुख्यतः जानवरों की लड़ाई, खेलकूद एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए उपयोग में लिया जाता है। इस स्टेडियम का आकार ऐसा है कि इसे इंजीनियरों ने बनाने की कोशिश की लेकिन यह एक पहेली बनकर ही रह गया है जिसे आज तक कोई सुलझा नहीं पाया।
पेट्रा
पेट्रा एक ऐतिहासिक नगरी है जो जॉर्डन के मयान प्रांत में बसी हुई है। यह बड़ी-बड़ी चट्टानों और पत्थर से तराशे गई इमारतों के लिए प्रख्यात है। इसकी खास बात यह है कि इसमें आपको पत्थर से तराशी गई एक से बढ़कर एक इमारतें देखने को मिलेंगी। वहीं इसके अलावा यहां तालाब और नेहरे भी हैं जो कि काफी सुनियोजित तरीके से बनाई गई है। जिसे देखने के लिए यहां काफी लोग आते हैं। इस शहर को रोज़ सिटी भी कहते है क्यूंकि यहां पत्थरों को काटकर कलाकृतियां बनाई गई है जो कि लाल रंग की है। कहते हैं कि 1200 ईसा पूर्व के आसपास इसका निर्माण कार्य शुरू किया गया था। लेकिन आज के समय में यह एक बहुत ही जाना माना पर्यटन स्थल बन गया है। बता दें कि पेट्रा को यूनेस्को ने विश्व की धरोहर के रूप में घोषित किया है। वहीं इसे विश्व के सात अजूबों में भी शामिल किया गया है।
चिचेन इत्ज़ा
यह एक बहुत पुराना एवं प्रसिद्ध मयान मंदिर है जो कि मेक्सिको में स्थित है। यह सबसे बड़े मयान मंदिर में से एक है। इसका निर्माण 600 ईसा पूर्व हुआ था। यह मंदिर लगभग 5 किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। एवं इसका आकार पिरामिड जैसा है। 79 फीट ऊंचाई के इस मंदिर में ऊपर जाने के लिए चारों ओर सीढ़ियां बनाई गई है जिसमें हर दिशा में लगभग 91 सीढ़ियां हैं यानी कि कुल मिलाकर इस मंदिर में 365 सीढ़ियां है जो कि साल के 365 दिन का प्रतीक है। साथ ही चिचेन इत्जा माया का एक सबसे बड़ा शहर भी है जिसकी जनसंख्या भी काफी अधिक है।